एक अनोखी दोस्ती बेस्ट फ्रेंड के लिए अपने एक बहुत ही घना और रहस्यमयी जंगल थावह एक बरगद का पेड़ था,
'महावृक्ष'।
अध्याय 1: नीलगिरी की पहाड़ियों के बीच एक बहुत ही घना और रहस्यमयी जंगल था।
उस जंगल के ठीक बीचों-बीच खड़ा एक 'महावृक्ष' था ।🌳🌲
वह एक बरगद का पेड़ था, लेकिन कोई साधारण पेड़ नहीं था।
उसकी जड़ें धरती के इतना अंदर तक थीं कि लोग कहते थे कि ऊस पेड़ कि जड़े
पाताल तक को भी छूती हैं,
और उसकी शाखाएं इतनी ऊँची थीं कि बादलों को चीर कर आकाश से बातें करती थीं।
उसी महावृक्ष की विशाल जड़ों के बीच एक छोटा सा बिल था, जिसमें 'चीकू' नाम का
एक खरगोश रहता था। चीकू बहुत ही फुर्तीला, सफेद रंग का और शरारती था।
जहाँ बाकी जानवर उस विशाल पेड़ की भव्यता से डरते थे, वहीं चीकू उसे अपना
सबसे अच्छा दोस्त मानता था।😊
अध्याय 2: पेड़ की खामोशी और चीकू की बातें महावृक्ष सदियों से वहाँ खड़ा था।
उसने राजाओं को आते-जाते देखा था, मौसमों को बदलते देखा था, लेकिन वह हमेशा
चुप रहता था। वह बस हवाओं के साथ अपनी पत्तियों को धीरे से हिलाता था।
एक दोपहर, जब सूरज बहुत तेज चमक रहा था, चीकू उछलते हुए पेड़ के पास आया
और उसकी छाल पर अपना सिर टिका कर बैठ गया।
"पता है दादा," चीकू ने पेड़ को 'दादा' कहकर पुकारा, "आज मुझे जंगल के दूसरी
तरफ बहुत ही मीठी गाजरें मिलीं। पर वहां एक लोमड़ी भी थी! मैंने उसे अपनी फुर्ती
से ऐसा छकाया कि वह झाड़ियों में जा गिरी। "पेड़ की पत्तियां अचानक जोर से खड़खड़ाईं,
जैसे वह हंस रहा हो। चीकू को महसूस हुआ कि महावृक्ष उसकी बातें सुन रहा है।
अध्याय 3: आने वाला संकट जंगल में सब कुछ ठीक चल रहा था, कि तभी एक दिन दूर से
मशीनों के गरजने की आवाज सुनाई दी। कुछ इंसान जंगल के उस हिस्से की ओर बढ़
रहे थे। वे लकड़हारे थे और उनकी नजर उस विशाल महावृक्ष पर थी। चीकू ने देखा कि
जंगल के अन्य जानवर डर कर भाग रहे हैं। लेकिन चीकू अपने दोस्त 'महावृक्ष' को
अकेला कैसे छोड़ सकता था? उसने ठान लिया कि वह इस विशाल पेड़ को बचाएगा,
चाहे इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े। कहानी अभी जारी है...
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ज़रूर, कहानी को आगे बढ़ाते हैं। चीकू और महावृक्ष की यह दोस्ती अब एक कठिन
परीक्षा के दौर से गुज़रने वाली है।
अध्याय 4: साहस की रणनीति लकड़हारों की आवाजें करीब आती जा रही थीं। चीकू ने देखा कि
उनके पास कुल्हाड़ियाँ और बड़ी-बड़ी आरी थीं। महावृक्ष अपनी जगह पर अडिग खड़ा था,
लेकिन उसकी पत्तियों में एक अजीब सी थरथराहट थी। शायद वह अपने छोटे दोस्त
की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। चीकू ने सोचा, "मैं इतना छोटा हूँ, मैं इन इंसानों को कैसे रोकूँगा?"
तभी उसकी नज़र महावृक्ष की एक लटकती हुई लंबी जड़ (बरोह) पर पड़ी। उसे एक उपाय सूझा। चीकू भागा-भागा जंगल के अन्य छोटे जानवरों के पास गया—गिलहरियाँ, चूहे, और मधुमक्खियाँ।
"दोस्तों!" चीकू चिल्लाया, "आज हमारे दादा (महावृक्ष) खतरे में हैं। अगर वे नहीं रहे, तो हमारा
घर भी नहीं रहेगा। क्या तुम मेरा साथ दोगे?"
चीकू की हिम्मत देखकर गिलहरियों ने फल इकट्ठा करना शुरू कर दिया और मधुमक्खियों ने अपने छत्तों को हिलाकर खुद को हमले के लिए तैयार कर लिया। चीकू ने सबको समझाया कि ताकत से नहीं, बल्कि एकता और बुद्धि से काम लेना होगा।
अध्याय 5: महावृक्ष का चमत्कार
अगले दिन सुबह-सुबह लकड़हारे महावृक्ष के तने के पास पहुँचे। जैसे ही मुख्य लकड़हारे ने
अपनी कुल्हाड़ी उठाई, चीकू ने सीटी बजाई।
* पहला हमला: ऊपर से गिलहरियों ने भारी और जंगली फलों की बारिश कर दी।
लकड़हारे बौखला गए।
* दूसरा हमला: जैसे ही वे संभले, चीकू ने मधुमक्खियों के छत्ते की ओर इशारा किया।
मधुमक्खियों के झुंड ने लकड़हारों के चारों ओर घेरा बना लिया।
तभी एक अद्भुत घटना घटी। महावृक्ष की जड़ें अचानक ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठीं और लकड़हारों के रास्तों को ब्लॉक कर दिया। अचानक तेज़ हवा चली और पेड़ से एक ऐसी
गहरी गूँज निकली जैसे कोई विशाल प्राणी बोल रहा हो। लकड़हारे बुरी तरह डर गए।
उन्हें लगा कि यह पेड़ कोई जादुई शक्ति है। वे अपनी कुल्हाड़ियाँ वहीं छोड़कर जंगल से बाहर
की ओर भाग खड़े हुए। चीकू अपनी छोटी सी पूँछ हिलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगा।
महावृक्ष ने अपनी एक लंबी टहनी को नीचे झुकाया और प्यार से चीकू की पीठ को सहलाया।
आज एक नन्हे से खरगोश ने दुनिया के सबसे बड़े पेड़ को बचा लिया था
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