यहाँ आपकी कहानी "चमत्कारी पारदर्शी चक्की" का एक सुंदर चित्रण है:
चमत्कारी पारदर्शी चक्की
कलाकार की दरिद्रता
सुंदर पहाड़ियों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में श्रीनाथ नाम का एक चित्रकार रहता था। उसकी कला में जादू था, लेकिन उसकी जेब खाली थी। लोग उसके चित्रों की प्रशंसा तो करते थे, पर उन्हें खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उसकी पत्नी मंजरी और छोटी बेटी अलख्या कई बार भूखे पेट सो जाते थे। श्रीनाथ अक्सर सोचता, "क्या मेरी कला कभी मेरे परिवार की भूख मिटा पाएगी?"
अनोखा उपहार
एक शाम, भारी बारिश से बचने के लिए श्रीनाथ एक पुरानी गुफा में रुका। वहाँ उसे मलबे में दबी हुई एक वस्तु मिली। जब उसने उसे साफ किया, तो वह दंग रह गया। वह काँच जैसी पारदर्शी चक्की थी। जैसे ही श्रीनाथ ने उसे छुआ, चक्की से एक मधुर आवाज़ आई:
"श्रीनाथ, मैं केवल अनाज नहीं पीसती। तुम मुझमें अपनी कल्पना डालो, मैं उसे हकीकत में बदल दूंगी।"
श्रीनाथ ने हिचकिचाते हुए चक्की में एक सूखा हुआ रंग का टुकड़ा डाला और उसे चलाया। अगले ही पल, चक्की से चमचमाते सोने के सिक्के और ताज़ा भोजन निकलने लगा। श्रीनाथ की आँखों में आँसू आ गए; उसके परिवार के दुखों का अंत हो गया था।
जमींदार की कुदृष्टि
श्रीनाथ की बदलती किस्मत की खबर गाँव के लालची जमींदार मुकुंद तक पहुँच गई। वह श्रीनाथ के घर पहुँचा और अपनी मूँछों पर ताव देते हुए बोला, "एक गरीब चित्रकार के पास इतना धन कहाँ से आया? ज़रूर इसने कुछ चोरी की है!"
मुकुंद ने अपने लठैतों के दम पर वह पारदर्शी चक्की छीन ली। वह उसे अपने महल ले गया और चिल्लाया, "मुझे दुनिया का सबसे अमीर आदमी बना दो!" उसने चक्की में मुट्ठी भर कंकड़ डाले और उसे ज़ोर-ज़ोर से घुमाने लगा।
लेकिन चक्की ने आवाज़ दी: "मैं केवल साफ मन वालों की सुनती हूँ।"
चक्की से सोने के बजाय हज़ारों की संख्या में काले भिनभिनाते मच्छर और मधुमक्खियाँ निकलने लगीं। मुकुंद और उसके सिपाही जान बचाकर वहाँ से भागे।
एक नई शुरुआत
अफरातफरी का फायदा उठाकर श्रीनाथ ने अपनी चक्की वापस ली। वह समझ गया था कि मुकुंद जैसे लोग उसे यहाँ चैन से नहीं रहने देंगे। उसी रात, श्रीनाथ ने मंजरी और अलख्या को साथ लिया और चक्की की मदद से एक सुंदर रथ तैयार किया।
वे उस लालची जमींदार का गाँव छोड़कर एक दूर शहर की ओर निकल पड़े, जहाँ कलाकारों का सम्मान होता था। चक्की ने उन्हें न केवल धन दिया, बल्कि श्रीनाथ को वह आत्मविश्वास भी दिया कि उसकी कला अनमोल है।
सीख
"चमत्कार भी उन्हीं का साथ देते हैं, जिनके इरादे नेक और मन साफ होता है।"
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